Wednesday, 6 May 2020

चांद से की है दोस्ती।

सारी यादाश्त खो जाए लेकिन कृष्णा को ना भूलू। ये बारिश ,ये चमकीली बूंदे, ये हरियाली, ये नादिया सब तेरी और लेे जाए।
मीठा ,नमकीन ,खट्टा ,तीखा सब बेस्वाद सा लगे तेरे बिना।

चांद से कर लू दोस्ती,रोज़ रात को तारे संग तुझे ढूंढू।
क्या मिलेगा कभी तू,क्या दिखेगा कभी तू। पता नहीं। 
ये खयाल है खोया सा।

जो एक बार तुझे देख लिया,फिर हर जगह देखा पर तेरे जैसा नहीं मिला।
फूलों की खुशबू सी,मीठे शहद सी।

ये कैसा जीना मरना जिसमें सफर में संग ही तू ना हो।

असली मज़ा तो खामोशियों में है,वो रात की मेहकी फिजाओं में है जब तुझे हम याद करे।जब हम तेरे आत्मदर्शन करे।

No comments:

Post a Comment