Friday, 7 August 2020

एक गहरी नींद।

मरने के बाद तो सोना ही है।क्यों ना उठा जाए।आंखे खोली जाए। निंदा और परेशानी मृत्यु के साथ चली जाएगी।तब ना शरीर काम का रहेगा ना लोगो की कड़वी बाते। जीवन रहते,जीवन के लिए अर्पित रहे।जीवन चाहे एक चीटी का हो या एक मनुष्य का। सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।दूसरो की पीढ़ा कम करना ही हमारा लक्ष्य है।

जिंदगी में मिले धोखे और झूट सब मिट्टी में मिल जाएंगे।रहेगा तो बस हमारा ईश्वर से संपर्क।इसलिए इस संपर्क को मजबूत बनाइए।

No comments:

Post a Comment