Wednesday, 6 May 2020

चांद से की है दोस्ती।

सारी यादाश्त खो जाए लेकिन कृष्णा को ना भूलू। ये बारिश ,ये चमकीली बूंदे, ये हरियाली, ये नादिया सब तेरी और लेे जाए।
मीठा ,नमकीन ,खट्टा ,तीखा सब बेस्वाद सा लगे तेरे बिना।

चांद से कर लू दोस्ती,रोज़ रात को तारे संग तुझे ढूंढू।
क्या मिलेगा कभी तू,क्या दिखेगा कभी तू। पता नहीं। 
ये खयाल है खोया सा।

जो एक बार तुझे देख लिया,फिर हर जगह देखा पर तेरे जैसा नहीं मिला।
फूलों की खुशबू सी,मीठे शहद सी।

ये कैसा जीना मरना जिसमें सफर में संग ही तू ना हो।

असली मज़ा तो खामोशियों में है,वो रात की मेहकी फिजाओं में है जब तुझे हम याद करे।जब हम तेरे आत्मदर्शन करे।

Friday, 1 May 2020

मंज़िल है श्री कृष्णा।

पग पग पर मिले तेरा साथ।सारे रास्ते तेरी ओर मिले।मंज़िल की परवाह किसे जब इतनी खूबसूरत राहे हो।
श्री कृष्णा के नाम में ही प्रेम है इतना कि पूरा संसार कम पड़ जाए।किस्मत,भाग्य ये तो कमजोर लोगो के लिए है।

असली जंग तो ज़िन्दगी के बाद की है।जब आपके पास कुछ ना हो,ना लोग,ना घर,ना धन, ना दुनिया। कहा भटकोगे अकेले। तालाश तो भगवान की ही करोगे।
आंखे बंद करे।ये गहरी सांसे जो आपके दिल तक जाती है,इन्हे महसूस करे।सारे दुख सुख भुला के ईश्वर को देखे।