जब काले बादल थे छाए।जब बेलागाम हुई दुखो की वर्षा।जब अन्याय से थक चुका था शरीर।जब रातो के सन्नाटे आंसुओं को सुनते।
तब आए दिल को शांत कराने इस ब्रम्हाण के प्रभु श्री कृष्ण। वाह,क्या मुस्कान है उनकी,जैसे सारे कठोर दर्द पानी की तरह निर्मल हो गए।एक सुबह नई हुई,मै भटकते रास्तों को छोड़ आई।हर सांस के लिए आभार व्यक्त करना सीखा।
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